Best poem on nature in hindi

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poem on nature in hindi
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मित्रों प्रकृति हमारे लिए बहुत महत्त्व रखती है प्रकृति के बिना हमारा जीवन सम्भव नही है आज हम आपके लिये poem on nature in hindi लाए है जो प्रकृति के महत्व को बताती है ।

  poem on nature in hindi

प्रकृति की लीला न्यारी,
कहीं बरसता पानी, बहती नदियां,
कहीं उफनता समंद्र है,
तो कहीं शांत सरोवर है।

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प्रकृति का रूप अनोखा कभी,
कभी चलती साए-साए हवा,
तो कभी मौन हो जाती,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी गगन नीला, लाल, पीला हो जाता है,
तो कभी काले-सफेद बादलों से घिर जाता है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी सूरज रोशनी से जग रोशन करता है,
तो कभी अंधियारी रात में चाँद तारे टिम टिमाते है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

prakriti par kavita

कभी सुखी धरा धूल उड़ती है,
तो कभी हरियाली की चादर ओढ़ लेती है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कहीं सूरज एक कोने में छुपता है,
तो दूसरे कोने से निकलकर चोंका देता है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।


hindi poem on nature – poem on nature in hindi

poem on nature in hindi
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हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
हर दिन तेरी लीला न्यारी,
तू कर देती है मन मोहित,
जब सुबह होती प्यारी।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
सुबह होती तो गगन में छा जाती लाली मां,
छोड़ घोसला पंछी उड़ जाते,
हर दिन नई राग सुनाते।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कहीं धूप तो कहीं छाव लाती,
हर दिन आशा की नई किरण लाती,
हर दिन तू नया रंग दिखलाती।
हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कहीं ओढ़ लेती हो धानी चुनर,
तो कहीं सफेद चादर ओढ़ लेती,
रंग भतेरे हर दिन तू दिखलाती।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कभी शीत तो कभी बसंत,
कभी गर्मी तो कभी ठंडी,
हर ऋतू तू दिखलाती।

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हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कहीं चलती तेज हवा सी,
कही रूठ कर बैठ जाती,
अपने रूप अनेक दिखलाती।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
कभी देख तुझे मोर नाचता,
तो कभी चिड़िया चहचाती,
जंगल का राजा सिह भी दहाड़ लगाता।

हे प्रकृति कैसे बताऊं तू कितनी प्यारी,
हम सब को तू जीवन देती,
जल और ऊर्जा का तू भंडार देती,
परोपकार की तू शिक्षा देती,
हे प्रकृति तू सबसे प्यारी।

prakriti par kavita – poem on nature in hindi


हरी हरी खेतों में बरस रही है बूंदे,
खुशी खुशी से आया है सावन,
भर गया खुशियों से मेरा आंगन।

ऐसा लग रहा है जैसे मन की कलियां खिल गई,
ऐसा आया है बसंत,
लेकर फूलों की महक का जशन।

धूप से प्यासे मेरे तन को,
बूंदों ने भी ऐसी अंगड़ाई,
उछल कूद रहा है मेरा तन मन,
लगता है मैं हूं एक दामन।

यह संसार है कितना सुंदर,
लेकिन लोग नहीं हैं उतने अकलमंद,
यही है एक निवेदन,
मत करो प्रकृति का शोषण।


prakriti par kavita – poem on nature in hindi

वन, नदियां, पर्वत व सागर,
अंग और गरिमा धरती की,
इनको हो नुकसान तो समझो,
क्षति हो रही है धरती की।

हमसे पहले जीव जंतु सब,
आए पेड़ ही धरती पर,
सुंदरता संग हवा साथ में,
लाए पेड़ ही धरती पर।

poem on nature in hindi

पेड़ -प्रजाति, वन-वनस्पति,
अभयारण्य धरती पर,
यह धरती के आभूषण है,
रहे हमेशा धरती पर।

बिना पेड़ पौधों के समझो,
बढ़े रुग्णता धरती की,
हरी भरी धरती हो सारी,
सेहत सुधरे धरती की।

खनन, हनन व पॉलीथिन से,
मुक्त बनाएं धरती को,
जैव विविधता के संरक्षण की,
अलख जगाए धरती पर।

– रामगोपाल राही

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